कुंभकार परिवार गढ रहे हैं मिट्टी की दीप व खिलौने
दीपावली की तैयारी में जुटे हुए हैं पूरा परिवार
दैनिक बालोद न्यूज/घनश्याम साव/डोंगरगांव। नगर के कुंभकार एवं मूर्तिकार मिट्टी को देवी-देवताओं के अनेक रूप प्रतिमा देने के बाद एक बार फिर व्यस्त हो गए हैं दीपावली के पूर्व उपयोगी मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमाओं के साथ-साथ घरों को रोशन करने वाले मिट्टी के दिए थे साथ ही बच्चों के रंग बिरंगे खिलौने को आकार दे रहे हैं त्यौहार के नजदीक आते ही कुंभ कारों ने मिट्टी को करने का कार्य भी तेजी से कर रहे हैं
नगर के प्रसिद्ध मूर्तिकार स्वर्गीय उमराव कुंभकार के छोटे भाई सोनऊ कुंभकार छत्तीसगढ़ राज्य हस्तशिल्प कला बोर्ड से सम्मानित हुई जो उनका पूरा परिवार सहित इस काम में जुटे हुए हैं स्वर्गीय उमराव कुंभकार की पत्नी सोनई एवं उनके छोटे भाई सोनऊ कुंभकार व परिवार के लीलाबाई गजेंद्र बलराम देवेंद्र कुमार एवं योगिता कुंभकार द्वारा रोज सुबह 5:00 बजे से रात्रि 7:00 बजे तक पूरा परिवार मिट्टी को अनेक रूप देकर मूर्ति व विभिन्न प्रकार के खिलौनों में रूप आकृति देकर अपना भरण-पोषण कर रहे हैं नवरात्रि पर्व के पूर्व तीज त्योहारों में भगवान गणेश की प्रतिमा विश्वकर्मा तथा देवी मां की प्रतिमा को कई रूप देने वाले हिना मूर्ति करो कुंभ कारों में अपनी मिट्टी और परंपराओं को जीवित रखा है नगर के इन प्रसिद्ध मूर्ति कारों को हस्तशिल्प कला बोर्ड ने पिछले वर्ष सम्मानित किया गया था उनका पूरा परिवार द्वारा बनाए गए मूर्तियों के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के दीया नारियल दीप कलश गमला गुल्लक बच्चों के विभिन्न प्रकार के खिलौने तथा मुसलमानों के शादी ब्याह के बर्तन भी बनाए जाते हैं कुंभकारों के बनाए हुए मिट्टी के देसीफ्रीज एवं अन्य सामग्री को नगर के अलावा राजनांदगांव दुर्ग भिलाई रायपुर एवं मध्य प्रदेश में भी अच्छे मांग हो रही है जिन्हे समय-समय पर ऑर्डर मिलने से छत्तीसगढ़ के अलावा बाहर गांव भी भेजे जाते हैं।
जब दैनिक बालोद न्यूज प्रतिनिधि घनश्याम साहू ने मौके पर कुंभकारों से विशेष रूप से चर्चा के दौरान बताया है
कि वर्तमान में इन कुंभ कारों को बारिश के चलते हैं मिट्टी समय पर नहीं मिल पा रही है उन्हें दूर 5 किलोमीटर सफर कर मिट्टी लाना पड़ता है क्षेत्र में अच्छी मिट्टी की किल्लत हो रही है जिनकी वजह से मिट्टी को दूरदराज से ढोना पड़ रहा है मिट्टी परिवहन से लेकर उनके गढ़ने तक काफी मेहनत होती है तब कहीं बाजार में जाकर मोल भाव के बाद दाम मिलता है बाजार में मांग के अनुसार दिए और विभिन्न प्रकार के खिलौने के निर्माण से अब ओर है लोगों का रुझान भी इस ओर है इस मिट्टी के बनाए गए सामग्री को रंग रोहन कर उनका स्वरूप किया जाता है तब उनकी मांग काफी अच्छे दामों में होती है।
देवेंद्र ने संभाला कुंभकार पीढ़ी का कारोबार
नगर के प्रसिद्ध मूर्तिकार सोनऊ कुंभकार के छोटे पुत्र देवेंद्र कुमार ने पढ़ाई लिखाई करते करते यह कारोबार अपने पूर्वज पीढ़ी से चलते आ रही है जिन्हें वे संभाल लिया है छोटे से इस उम्र देवेंद्र कुमार ने मिट्टी से देसी फ्रिज मटका घड़ा कलोरी चुकिया गुल्लक नारियल सुरही कंडील दीया मलवा गुलदस्ता कंडील लैंप शिवलिंग हाथी घोड़ा ओम मुसलमानों के विभिन्न प्रकार के शादी ब्याह के बर्तन भी मिट्टी से बनाए जाते हैं कुंभकारों के परिवार ने वर्तमान में 50 हजार से अधिक दीपावली के लिए मिट्टी के दीया का आर्डर बनाने में पूरा परिवार जुड़ गए हैं शासन से कुंभकारों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।