“बिन पानी सब सुन” कहावत का चरितार्थ करता सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डोंगरगांव, बुंद बुंद पानी के लिए तरस रहा है अस्पताल कर्मचारी व मरीज

पानी की समास्या से दो साल में भी नहीं दिला पाए निजात लगभग पांच बोर खुदाई करवाने के बाद भी बुंद भर पानी नहीं निकला

दैनिक बालोद न्यूज/घनश्याम साव/डोंगरगांव।नगर में करोड़ों का खर्च कर नवीन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भवन का निर्माण दो वर्ष से पहले किया गया है लेकिन अस्पताल का निर्माण ऐसे स्थान पर किया गया है जो एक चट्टान क्षेत्र है और जहां पर पानी की समास्या के लिए प्रतिदिन अस्पताल कर्मचारी व मरीज पीने के पानी से लेकर निस्तारी तक के लिए बुंद भर पानी तक नसीब नही हो पाने के कारण हलाकान हो रहें हैं शासन प्रशासन इस समास्या से कब निजात दिला पायेंगे कुछ कहा नहीं जा सकता है क्योंकि ये समास्या आज कि नही है पिछले दो वर्षों से चले आ रहा है लेकिन खत्म नहीं हो पा रहा है अस्पताल के लिए प्रतिदिन चार से पांच हजार लीटर पानी की आवश्यकता होती है जिसमें पैथालॉजी जांच, ड्रेसिंग कक्ष अस्पताल के साफ सफाई व मरीज को पीने के पानी से लेकर निस्तारी के लिए अति आवश्यक है।

अस्पताल में लगभग पांच बोर खुदाई हो चुका है लेकिन पानी की एक बुंद भी नहीं निकाल पाए

चट्टान पर बने अस्पताल में लगभग दो साल में पांच बोर खनन कर चुके हैं लेकिन अस्पताल के पानी की समास्या से निजात नहीं दिला पा रहे हैं एक तरफ प्रशासन और जन प्रतिनिधि बोर खनन करके पहाड़ी चट्टान पर खुदाई करके पैसे का बंदरबांट कर रहे हैं अभी एक सप्ताह पहले फिर साढ़े पांच सौ फीट खुदाई किया गया लेकिन बुंद भर पानी नहीं निकला जिससे आम जनता और अस्पताल को कोई फायदा नही मिल पा रहा है। वहीं कुछ छुट पुटिया जन प्रतिनिधि पिछले वर्ष इसी समास्या पर अपना ज्ञान पेलकर गया था ये हमारे समास्या है हम इसे दूर करेंगे लेकिन इस समास्या आज भी जैसा तैसा पड़ा हुआ है लेकिन छुटपुटिया जन प्रतिनिधि अस्पताल में अब इस वर्ष चेहरा दिखाने भी नहीं पहुंच पा रहे हैं।

सिर्फ और सिर्फ पाइप लाइन बिछाकर ही समास्या को निजात दिला सकते हैं

नगर पंचायत के मैन सप्लाई पाइप लाइन से जोड़कर अस्पताल तक बिछाने की आवश्यकता है जिससे पानी एक टंकी में स्टोर कर अस्पताल में ऊपर टंकी तक पहुंचाकर इस समास्या से निजात पा सकते हैं लेकिन इस और न तो जिम्मेदार जन प्रतिनिधि और न ही जिला प्रशासन ध्यान दें रहें हैं जिससे अस्पताल में कार्यरत अधिकारी कर्मचारी व मरीज को ज़रूरत के समय पानी के बुंद बुंद के लिए मुंह ताकना पड़ रहा है अभी तो सिर्फ गर्मी की शुरुआत हुई है और मार्च खत्म हुआ अभी पुरी गर्मी का अप्रैल मई और जून पड़ा है कैसे निकलेंगे पानी की इस समास्या से अस्पताल के अधिकारी कर्मचारी अभी से चिंतित हैं।

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