छत्तीसगढ़ को बने 23 साल हो गए लेकिन विकास कहां पर रुकी हुई है देखें एक पुल भी नहीं बना पाए इतने वर्षों में कैसे अपने जीवन को जोखिम में डालकर नदी नाले पार कर जाते हैं स्कूली बच्चे व ग्रामीण , ग्रामीणों ने विधानसभा चुनाव बहिष्कार करने का लिया निर्णय पढ़ें

विकास के नाम पर ग्राम पंचायत भट्गुना तरस रहा है क्षेत्र के जनप्रतिनिधि का ध्यान अपेक्षित विकास के नाम पर ढिंढोरा पीटने वाले एक बार अवश्य झांकें इधर

दैनिक बालोद न्यूज/घनश्याम साव/डोंगरगांव।राजनांदगांव जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर व विकासखण्ड से महज 05 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत भटगुना का हाल देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि छत्तीसगढ़ में कितना विकास हुआ है आज छत्तीसगढ़ के बने 23 पुरा हो गया है लेकिन इतने वर्षों में कोई भी सरकार इन ग्रामीणों के मांगों पर कभी भी बनाने के लिए न आश्वासन दिया और न ही इनके मांगों को पूरा किया क्षेत्र के विधायक दलेश्वर साहू लगातार दो बार विधायक रहे हैं लेकिन जनता के मांगों को अनुसुना कर दिया ऐसा ग्रामीणों ने आरोप लगाते हुए बताया है कि हम लगातार अपने गांव के बाहरी क्षेत्र में छोटे से नाले है जो शिवनाथ नदी में थोड़ा सा पानी भरने पर हमारे गांव से निकलने वाली घुमरिया नाला की ओर उलट आने से पानी रपटा बहुत नीचे होने के वजह से पानी पुल के ऊपर चढ़ जाता है हमारे गांव के स्कूली पढ़ने वाले छोटे बच्चे और किसान ग्रामीणो को रपटा पार कर पाना मुश्किल हो जाता है लेकिन फिर भी अपने जान जोखिम में डालकर पार करते हैं। वहीं कुछ स्कूली बच्चे व किसान अपने जीवन के साथ रिस्क न उठाते हुए पांच किलोमीटर अतिरिक्त खेत के मेड पर चलकर कबीरमठ नादिया गांव की ओर से आना जाना करते हैं। अनेकों बार मांग करने के बाद भी न शासन प्रशासन ध्यान दिया जिसका खामियाजा भुगत रहे हैं।

चेतन साहू सरपंच ग्राम पंचायत भटगुना ने बताया कि

हमारे गांव के इस पुल निर्माण करने के लिए अनेकों बार पत्राचार विधायक को किया साथ ही जिला प्रशासन कलेक्टर को भी ग्रामीणों ने जाकर मिला लेकिन शासन प्रशासन के निष्क्रियता के चलते हुए मांग पुरा नही हुआ हमारे गांव में पुल बनने से रूदगांव भाखरी अर्जुनी,रातापयली,किरगी रीवागाहन जैसे अनेकों गांव के ग्रामीणों को आने जाने से सुहलियत मिलेगा लेकिन शासन प्रशासन के सुस्त रवैया से ग्रामीण भुगतना पड़ रहा है।

विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करने का लिया ग्रामीणों ने निर्णय

लगातार ग्रामीणों ने अपने मांगों को लेकर अनेकों बार पत्राचार करने के बाद भी शासन प्रशासन के इस निष्क्रियता से परेशान होकर ग्रामीणों ने निर्णय लिया है कि आने वाले समय विधानसभा चुनाव में किसी भी प्रकार से शामिल नहीं होंगे और अपना विरोध प्रदर्शन करते हुए चुनाव का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है क्या शासन प्रशासन इन ग्रामीणों के बहुप्रतीक्षित मांगों को पूरा कर पाएंगे अब आने वाले समय पर ही पता चल पाएगा।

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